अंतर मन


अंतर मन में बाते
चलती है कितनी,
पर किससे करे शिकायत
जब स्वयं में ही हो
कमियाँ इतनी |

रात के गहन अंधकार में
शांति जब फैल जाती है ऐसे
विरक्त हवा भी
थम गयी हो जैसे,
एक गूंज
करती है परेशान
देती है हर पल
दस्तक मन में ,
जैसे दे रही हो चुनोती
अस्तित्व को मेरे
और मै ,
करके अनसुना उस आवाज़ को
एक हँसी का सहारा लेकर
नींद के आगोश में चला जाता हूँ |

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